February 26, 2026

खाकी पर दाग: ‘मासूम की मौत’ पर रिश्वत का खेल, SI-ASI ACB के जाल में गिरफ्तार

IMG-20260226-WA0066.jpg



कोरिया, छत्तीसगढ़। जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने इंसानियत और कानून—दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मजदूर परिवार अपने मासूम बेटे की डूबने से हुई मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि आरोप है—जांच के नाम पर पुलिसकर्मियों ने उसी त्रासदी को ‘कमाई’ का जरिया बना लिया।
एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) अंबिकापुर की टीम ने कार्रवाई करते हुए बचरापोड़ी चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक अब्दुल मुनाफ को 25,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। मामले में सहायक उप निरीक्षक गुरु प्रसाद यादव को भी साजिश और रिश्वत मांगने के आरोप में पकड़ा गया है।




हादसे से शुरू हुई कहानी

जानकारी के अनुसार, प्रार्थी सत्येन्द्र कुमार प्रजापति के घर पर ईंट निर्माण का कार्य चल रहा था। परिसर में खोदे गए गड्ढे में पानी भर गया था। वहीं काम कर रहे मजदूर मोहित घसिया के मासूम बेटे की कथित तौर पर उसी गड्ढे में डूबने से मौत हो गई।

परिवार गहरे शोक में था, लेकिन आरोप है कि संवेदनशीलता दिखाने के बजाय मामले की जांच को लेकर दबाव और सौदेबाज़ी शुरू हो गई।




जांच के नाम पर ‘डील’ का आरोप

प्रार्थी का आरोप है कि उस समय चौकी में पदस्थ एएसआई गुरु प्रसाद यादव ने जांच की आड़ में 50,000 रुपये की मांग की और मामला रफा-दफा करने का संकेत दिया। बातचीत के बाद कथित तौर पर 25,000 रुपये में ‘सौदा’ तय हुआ।

बताया जाता है कि गुरु प्रसाद यादव के तबादले के बाद भी रिश्वत की मांग खत्म नहीं हुई। नए चौकी प्रभारी उप निरीक्षक अब्दुल मुनाफ पर आरोप है कि उन्होंने पद संभालते ही ‘बची रकम’ लेने के लिए प्रार्थी को चौकी बुलाया।




ACB का ट्रैप, रंगे हाथों गिरफ्तारी

भ्रष्टाचार से परेशान होकर प्रार्थी ने ACB अंबिकापुर से शिकायत की। शिकायत का सत्यापन करने के बाद ब्यूरो ने ट्रैप की योजना बनाई।

निर्धारित रणनीति के तहत जैसे ही प्रार्थी ने चौकी में 25,000 रुपये उप निरीक्षक को सौंपे, घात लगाए बैठी टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। आगे की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एएसआई गुरु प्रसाद यादव को भी रिश्वत मांगने और साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया।




कानूनी धाराएं और कार्रवाई

आरोपी: उप निरीक्षक अब्दुल मुनाफ, सहायक उप निरीक्षक गुरु प्रसाद यादव

धाराएं: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 (लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेना) और धारा 12 (रिश्वत दिलाने/उकसाने में सहयोग)

स्थिति: दोनों आरोपियों को विधिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार कर आगे की जांच जारी





सिस्टम पर उठते सवाल

यह मामला न केवल पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि क्या शोकाकुल और कमजोर वर्ग के लोगों पर जांच के नाम पर दबाव बनाना एक ‘प्रवृत्ति’ बनती जा रही है?

हालांकि, ACB की त्वरित कार्रवाई यह संदेश देती है कि वर्दी की आड़ में अवैध वसूली करने वालों पर कानून का शिकंजा कसना तय है।

WhatsApp Image 2024-11-28 at 11.00.00_52e96eec
+ posts
BREAKING