“माँ चली गई… अब उसके पैसों के लिए भटक रहा बेटा: रायगढ़ में सिस्टम की बेरुखी ने फिर तोड़ा दिल”
रायगढ़।
एक माँ की मौत के बाद उसका सहारा बनने की जगह जब सिस्टम ही दीवार बन जाए, तो दर्द सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रहता—वह पूरे समाज की संवेदनहीनता की कहानी बन जाता है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से सामने आई एक ऐसी ही मार्मिक घटना ने हर किसी का दिल झकझोर दिया है।
घरघोड़ा ब्लॉक के कुडुमकेला गांव का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक युवक, जिसकी माँ अब इस दुनिया में नहीं है, उसकी जमा-पूंजी—महज 44 हजार रुपये—को पाने के लिए दर-दर भटकता नजर आ रहा है। उसकी आवाज में बेबसी है, आंखों में आंसू हैं, और शब्दों में सिस्टम के प्रति गहरी पीड़ा।
युवक बार-बार बैंक के चक्कर लगा चुका है, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी। वह बताता है कि उसकी माँ के खाते में जमा पैसे उसके लिए बहुत मायने रखते हैं, लेकिन बैंक प्रशासन उसकी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा। यह सिर्फ पैसों की बात नहीं, बल्कि उस बेटे की उम्मीदों और मजबूरी की कहानी है, जो अपनी माँ की आखिरी निशानी को पाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
इस घटना ने लोगों को उस हालिया दर्दनाक वाकये की याद दिला दी, जब ओडिशा के केंदुझर जिले में एक भाई को अपनी मृत बहन के खाते से पैसे निकालने के लिए उसका कंकाल तक बैंक ले जाना पड़ा था। उस घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा किया था और बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
अब रायगढ़ की यह घटना एक बार फिर वही सवाल दोहरा रही है—क्या सिस्टम आम इंसान की भावनाओं को समझने में पूरी तरह विफल हो चुका है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण और गरीब वर्ग के लिए बैंकिंग प्रक्रिया आज भी एक जटिल पहेली बनी हुई है। खासकर ऐसे संवेदनशील मामलों में, जहां इंसान पहले ही टूट चुका होता है, वहां नियमों की कठोरता उसकी पीड़ा को और बढ़ा देती है।
फिलहाल यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आ चुका है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन वायरल वीडियो ने लोगों के दिलों में गुस्सा और आंखों में नमी जरूर भर दी है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या इस बेटे को उसकी माँ की आखिरी जमा-पूंजी मिल पाएगी, या फिर वह यूं ही सिस्टम के दरवाजों पर दस्तक देता रह जाएगा…
— एक सवाल, जो सिर्फ इस बेटे का नहीं, पूरे समाज का है।

