नगरगुडी के पास स्थापित की जाएगी जगतू महरा की प्रतिमा,समाज में खुशी का माहौल
जगदलपुर। नगरगुडी के पास स्थापित की जाएगी जगतू महरा की प्रतिमा,लंबे समय से महरा समाज के लोग नगर में जगतू महरा की प्रतिमा लगाना चाहते थे लेकिन शासन द्वारा कोई भूखंड आबंटित नहीं हो पा रहा था अब शासन ने नगर में दंतेश्वरी मंदिर के सामने नगरगुडी के पास 20 फीट लंबा 20 फीट चौड़ा भूखंड समाज को आबंटित कर दिया है।भूमि आबंटित होने की खुशी में समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होकर दलपत सागर किनारे स्थित रखवार बाबा गुड़ी में एकत्रित होकर 201 दीप जलाकर बाबा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
कौन हैं जगतू महारा,क्या है इनका इतिहास
17वीं शताब्दी में राजा दलपत देव ने बस्तर राज्य की नई राजधानी बसाने का निर्णय लिया। परंपरागत लोककथाओं और क्षेत्रीय इतिहास के अनुसार, इस कार्य में उन्हें जगतूगुड़ा कबीले के सरदार जगतू महरा से महत्वपूर्ण सहायता मिली। कबीले के सरदार के सम्मान में ही नई राजधानी का नाम जगदलपुर रखा गया — अर्थात् “जगतू का पुर” (नगर)।
जगदलपुर की स्थापना और राजा दलपत देव
छत्तीसगढ़ के दक्षिणी अंचल में स्थित जगदलपुर आज बस्तर संभाग का प्रमुख नगर है। इसकी स्थापना 17वीं शताब्दी में बस्तर के शासक राजा दलपत देव द्वारा की गई थी। उस समय बस्तर राज्य राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से विस्तार पर था, जिसके कारण एक सुदृढ़ और व्यवस्थित राजधानी की आवश्यकता महसूस की गई।
नई राजधानी की आवश्यकता
पुरानी राजधानी प्रशासनिक दृष्टि से पर्याप्त नहीं रह गई थी। राज्य के सुचारु संचालन, सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार के लिए एक नए, सुव्यवस्थित नगर की स्थापना आवश्यक थी। राजा दलपत देव ने एक ऐसे स्थान का चयन किया जो प्राकृतिक संसाधनों, जल स्रोतों और सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त था।
जगतू महरा का योगदान
स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इस नई राजधानी के निर्माण में जगतूगुड़ा कबीले के सरदार जगतू महरा ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। उन्होंने न केवल उपयुक्त स्थान के चयन में सहायता की, बल्कि स्थानीय जनजातीय समुदायों का समर्थन भी सुनिश्चित किया। उनके योगदान से राजधानी का निर्माण सुचारु रूप से संभव हो पाया।
नामकरण का इतिहास
राजा दलपत देव ने सरदार जगतू महरा के सम्मान में इस नगर का नाम “जगदलपुर” रखा। यह नाम उनके प्रति कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक है। इस प्रकार, जगदलपुर केवल एक प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय जनजातीय सहयोग और राजसत्ता के सामंजस्य का प्रतीक भी है।
ऐतिहासिक महत्व
समय के साथ जगदलपुर बस्तर की सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया। आज भी यह नगर बस्तर की ऐतिहासिक धरोहर और जनजातीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है।
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