August 6, 2026

हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय: सहमति के अभाव में प्रतिनियुक्ति असंवैधानिक, धरमजयगढ़ SDOP सिद्धांत तिवारी की प्रतिनियुक्ति रद्द

IMG_20260806_143501.jpg




रायगढ़, 4 अगस्त 2026। प्रशासनिक निर्णयों में प्रक्रिया और नियमों की अनदेखी पर एक बार फिर न्यायपालिका ने स्पष्ट संदेश दिया है। सिद्धांत तिवारी को ईओडब्ल्यू-एसीबी, रायपुर में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के राज्य सरकार के आदेश को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है।

न्यायालय ने अपने आदेश में दो टूक कहा कि प्रतिनियुक्ति जैसे मामलों में संबंधित अधिकारी की सहमति लेना अनिवार्य है और इसे प्रशासनिक सुविधा के नाम पर दरकिनार नहीं किया जा सकता।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने रिकॉर्ड का परीक्षण किया। कोर्ट के सामने यह तथ्य स्पष्ट हुआ कि 13 जुलाई 2026 को गृह (पुलिस) विभाग द्वारा जारी आदेश में तिवारी की सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर लेकर रायपुर स्थित ईओडब्ल्यू-एसीबी में पदस्थ करने का उल्लेख था, जबकि इसके लिए उनकी सहमति नहीं ली गई थी।

“प्रतिनियुक्ति, तबादला नहीं”—याचिकाकर्ता का तर्क

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि यह सामान्य तबादले का मामला नहीं है, बल्कि प्रतिनियुक्ति का है, जिसके लिए सेवा नियमों के अनुसार पूर्व सहमति आवश्यक होती है। बिना सहमति के जारी आदेश स्थापित सेवा सिद्धांतों के विपरीत है, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

राज्य का पक्ष: “जांच पूरी करने की आवश्यकता”

राज्य सरकार ने अपने जवाब में तर्क दिया कि ईओडब्ल्यू-एसीबी में लंबित प्रकरणों की जांच को शीघ्र पूरा करने के लिए अतिरिक्त अधिकारियों की जरूरत है। इसी उद्देश्य से यह प्रतिनियुक्ति आदेश जारी किया गया। साथ ही, छत्तीसगढ़ मूलभूत नियमों के नियम 110 का हवाला देते हुए कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी को कुछ परिस्थितियों में बिना सहमति स्थानांतरण का अधिकार है।

कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी: नियमों से समझौता नहीं

हालांकि, कोर्ट ने राज्य के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि जब नियुक्ति प्रतिनियुक्ति के रूप में की जा रही है, तो सहमति का नियम लागू होगा और इसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

न्यायालय ने कहा कि प्रशासनिक आवश्यकता या लंबित जांचों का दबाव, सेवा नियमों की अनिवार्यता को खत्म नहीं कर सकता। इस आधार पर प्रतिनियुक्ति आदेश को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया गया।

आगे का रास्ता खुला

कोर्ट ने अपने फैसले में राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता भी दी है कि वह नियमों का पालन करते हुए नया आदेश जारी कर सकती है।

इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और सेवा नियमों की मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर पुलिस विभाग में प्रतिनियुक्ति और तबादलों की प्रक्रिया को लेकर यह निर्णय आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।

WhatsApp Image 2024-11-28 at 11.00.00_52e96eec
+ posts
BREAKING