‘म्यूल बैंक खातों’ के जरिए करोड़ों की साइबर ठगी का पर्दाफाश, 122 गिरफ्तार; 2000 से अधिक संदिग्ध खातों की जांच जारी
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए म्यूल (डमी) बैंक खातों के माध्यम से संचालित साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस की विशेष जांच में अब तक 122 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 117 खाताधारक और 5 एजेंट शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान साइबर ठगी से जुड़े लगभग 3 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए हैं, जबकि 2000 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों की जांच अभी भी जारी है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को नौकरी, आसान कमाई और कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर नए बैंक खाते खुलवाता था। कई मामलों में खाताधारक एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल नंबर और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी भी आरोपियों को सौंप देते थे। इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन सट्टा और कस्टमर केयर फ्रॉड जैसी साइबर वारदातों में ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए किया जाता था।
जांच के दौरान पुलिस ने एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, केवाईसी दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। पुलिस मुख्यालय की साइबर तकनीकी टीम, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) तथा विभिन्न राज्यों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर बैंक ट्रांजेक्शन, केवाईसी रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग लॉग और यूपीआई रिकॉर्ड की गहन जांच की गई।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि बैंक खाते खोलने, केवाईसी प्रक्रिया और संदिग्ध लेन-देन की निगरानी में कहीं किसी बैंक अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा मिलीभगत तो नहीं रही। यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दें। ऐसा करना न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है, बल्कि व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।



