मालगाड़ी की चपेट में आया जंगली हाथी, इलाज के दौरान मौत; वन्यजीव सुरक्षा पर फिर उठे सवाल,
चारमार के पास की घटना
घरघोड़ा। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा वन परिक्षेत्र में इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की एक और चिंताजनक घटना सामने आई है। चारमार गांव के समीप एक जंगली हाथी मालगाड़ी की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी उपचार के दौरान मौत हो जाने की पुष्टि वन विभाग ने की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब हाथियों का एक दल रेलवे ट्रैक के आसपास विचरण कर रहा था। इसी दौरान एक हाथी तेज रफ्तार मालगाड़ी की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि हाथी के एक पैर में गहरी चोट आई और उसके शरीर से लगातार रक्तस्राव होने लगा। घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति बन गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुटने लगे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल मोर्चा संभाला। वन मंडल अधिकारी रायगढ़ के निर्देशन में उप वन मंडल अधिकारी आशुतोष पांडव एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांत सिंह अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और राहत व बचाव कार्य शुरू कराया। घायल हाथी के उपचार के लिए चार डॉक्टरों और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम को मौके पर तैनात किया गया।
हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद हाथी की हालत लगातार बिगड़ती गई। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चोट अत्यंत गंभीर थी और अधिक रक्तस्राव के चलते उसे बचाया नहीं जा सका। बाद में फॉरेस्ट एसडीओ घरघोड़ा आशुतोष मंडावा ने हाथी की मौत की आधिकारिक पुष्टि की।
इस दौरान एक और चुनौती यह रही कि घायल हाथी के आसपास पांच अन्य हाथियों का दल भी मौजूद था, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई थी। वन विभाग ने एहतियात के तौर पर पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी और ग्रामीणों से हाथियों के झुंड से दूर रहने की अपील की।
ग्रामीणों और वन अमले की संयुक्त निगरानी में पूरे घटनाक्रम को संभाला गया, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वन क्षेत्रों से गुजरने वाली रेलवे लाइनों पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के पारंपरिक मार्गों (कॉरिडोर) में बढ़ती मानवीय गतिविधियों और तेज रफ्तार रेल यातायात के कारण ऐसे हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रेनों की गति नियंत्रित करने, निगरानी तंत्र मजबूत करने और वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए ठोस उपाय किए जाएं।
फिलहाल वन विभाग आगे की कार्रवाई में जुटा है और घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।

