MMGSY सड़क निर्माण में बड़ा घोटाला? घटिया सामग्री और नई सड़क में दरारों से भड़के ग्रामीण, उच्चस्तरीय जांच की मांग
घरघोड़ा। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना (MMGSY) के तहत छाल रोड से तिलाईपाली–पंडरीपानी स्कूल तक निर्मित की जा रही सीसी सड़क अब गंभीर विवादों में घिरती नजर आ रही है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं और गुणवत्ता से समझौता किए जाने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस सड़क में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर यह कहकर कि नीचे पुरानी सड़क मौजूद है, सीसी सड़क की मोटाई निर्धारित मानकों के बजाय मात्र लगभग 4 इंच रखी जा रही है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो यह न केवल निर्माण गुणवत्ता बल्कि सरकारी धन के उपयोग पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में उपयोग किए जा रहे मटेरियल की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि बेस लेयर में गिट्टी, मरम और अन्य निर्माण सामग्री का निर्धारित अनुपात नहीं रखा जा रहा है। वहीं सड़क की मजबूती के लिए आवश्यक छोटी गिट्टी का उपयोग भी पर्याप्त मात्रा में नहीं किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि इस प्रकार की लापरवाही भविष्य में सड़क की आयु और स्थायित्व को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
नई सड़क में दिखने लगी दरारें
सबसे चिंताजनक बात यह है कि निर्माणाधीन अथवा हाल ही में निर्मित सड़क के कुछ हिस्सों में अभी से दरारें दिखाई देने लगी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पूरी तरह तैयार होने से पहले ही यदि ऐसी स्थिति सामने आ रही है तो निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप
सड़क निर्माण से जुड़े जानकारों के अनुसार मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं अन्य ग्रामीण सड़क योजनाओं में सड़क की संरचनात्मक मोटाई, बेस लेयर, कम्पेक्शन और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप होना अनिवार्य है। सामान्य परिस्थितियों में सड़क की कुल संरचनात्मक मोटाई मिट्टी की प्रकृति एवं यातायात भार के अनुसार तय की जाती है। ऐसे में यदि निर्माण कार्य स्वीकृत डिजाइन और मानकों के अनुरूप नहीं किया गया है, तो इसकी तकनीकी जांच आवश्यक हो जाती है।
अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे विभागीय अधिकारियों एवं संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि सड़क की मोटाई और गुणवत्ता में वास्तव में कमी बरती जा रही है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि निर्माण कार्य का मापन और भुगतान किन मानकों के आधार पर किया जाएगा।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं हुई तो सरकारी राशि का दुरुपयोग होने के साथ-साथ क्षेत्र की जनता को भी लंबे समय तक खराब सड़क का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रशासन और संबंधित विभाग क्या कार्रवाई करते हैं तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब किस प्रकार दिया जाता है।

