सामाजिक बहिष्कार पर अदालत का बड़ा फैसला: 8 साल बाद पीड़ितों को मिला न्याय, पांच दोषी करार
बालोद। मामला ग्राम सोहपुर की है जहां सामाजिक बहिष्कार जैसे संवेदनशील मामले में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। मामले में चार आरोपियों को 6-6 माह के साधारण कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई, जबकि एक आरोपी की अधिक आयु को देखते हुए उसे न्यायालय उठने तक की सजा एवं अर्थदंड दिया गया। इस फैसले को सामाजिक अन्याय के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
मामला साहू समाज से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में कर्मा जयंती समारोह के लिए प्रत्येक घर से चंदा लेने का विरोध करने पर दो ग्रामीणों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि समाज के कुछ पदाधिकारियों द्वारा उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया तथा सामाजिक गतिविधियों से अलग कर दिया गया।
करीब दो वर्षों तक सामाजिक बहिष्कार की पीड़ा झेलने के बाद पीड़ितों ने वर्ष 2019 में न्यायालय की शरण ली। लगभग सात वर्षों तक चली सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए फैसला सुनाया।
न्यायालय ने तत्कालीन सामाजिक पदाधिकारियों सहित पांच लोगों को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत सजा सुनाई। फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि सत्य और न्याय की जीत है।
यह मामला समाज में बढ़ती असहिष्णुता और सामाजिक दबाव की प्रवृत्ति पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी समाज को जोड़ने की होती है, न कि मतभेद रखने वालों को बहिष्कृत करने की। अदालत का यह फैसला सामाजिक समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के पक्ष में एक मजबूत संदेश माना जा रहा है।

