“कागज़ों में स्वच्छता, ज़मीनी हकीकत में कचरा – घरघोड़ा की बदहाल सफाई व्यवस्था उजागर”
घरघोड़ा – जहाँ एक ओर स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था ऐसी है कि सड़क किनारे जमा कचरा और पानी भरे गड्ढे अब स्थायी निवासी बन चुके हैं।
तस्वीर खुद बोल रही है—सड़क के किनारे जमा गंदा पानी, उसके आसपास बिखरा कचरा और उठती बदबू मानो राहगीरों का स्वागत करने के लिए तैयार खड़ी हो। लगता है जैसे नगर पंचायत ने “स्वच्छता” को केवल कागजों तक सीमित रखने का ठेका ले रखा हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां सफाई कर्मचारी शायद “विशेष अवसरों” पर ही दर्शन देते हैं। बाकी दिनों में कचरा और कीचड़ ही इस इलाके की पहचान बन चुके हैं। राहगीरों के लिए यह जगह किसी एडवेंचर ट्रैक से कम नहीं—कहाँ पैर रखें और कहाँ नहीं, यह खुद ही तय करना पड़ता है।
हैरानी की बात यह है कि यह सब मुख्य सड़क के पास हो रहा है, जहाँ से रोज़ाना अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी गुजरते होंगे। लेकिन शायद उन्होंने भी “नजरअंदाज करने की कला” में महारत हासिल कर ली है।
👉 अगर यही हाल रहा, तो वो दिन दूर नहीं जब घरघोड़ा की पहचान “स्वच्छ नगर” नहीं, बल्कि “कचरा नगर” के रूप में होने लगेगी।
अब सवाल यह है:
क्या नगर पंचायत केवल बैठकों और फाइलों तक सीमित रहेगी, या फिर जमीन पर भी सफाई का कोई असर दिखाई देगा?

