धरमजयगढ़ में कोर्ट निर्माण पर विवाद: पुलिस कॉलोनी बनाम वकील, प्रशासन असमंजस में
धरमजयगढ़ में प्रस्तावित न्यायालय भवन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। थाना परिसर की जमीन पर कोर्ट निर्माण की योजना ने पुलिस कॉलोनी में रहने वाले परिवारों और वकीलों को आमने-सामने ला खड़ा किया है। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई है कि प्रशासन फिलहाल मूक दर्शक की भूमिका में नजर आ रहा है।
मंगलवार को जब वकीलों की एक टीम प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण करने पहुंची, तो पुलिस कॉलोनी की महिलाओं ने इसका जोरदार विरोध किया। मौके पर तीखी बहस और नोकझोंक देखने को मिली। महिलाओं का कहना है कि वे वर्षों से यहां निवास कर रही हैं और अचानक कोर्ट निर्माण का निर्णय उनके लिए विस्थापन का खतरा बन गया है।
प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं ने प्रशासन पर बिना सूचना और सहमति के निर्णय लेने का आरोप लगाया। उनका सवाल है कि यदि यहां कोर्ट बनाया जाता है तो उनके परिवारों का पुनर्वास कहां होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, उसके बाद ही किसी निर्माण कार्य पर विचार किया जाए।
वहीं, वकीलों का पक्ष है कि क्षेत्र में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कोर्ट भवन का निर्माण आवश्यक है। उनका कहना है कि उचित स्थान पर न्यायालय बनने से आम लोगों को सुविधा मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
इस बीच, पुराने राजस्व अभिलेख भी विवाद का हिस्सा बन गए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, यह जमीन वर्ष 1929 से थाना परिसर के रूप में दर्ज है और वर्ष 2012 के रिकॉर्ड में भी इसका उपयोग पुलिस विभाग से जुड़ा बताया गया है। ऐसे में भूमि के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर न्यायालय भवन की आवश्यकता, तो दूसरी ओर पुलिस परिवारों का आवास। फिलहाल इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे स्थिति और जटिल होती जा रही है।
धरमजयगढ़ में यह मामला अब केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों के अधिकार, पुनर्वास और प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।




