February 5, 2026

यह कैसा विकास? जंगल उजड़े, नदियाँ सूखी और जानवर सड़कों पर

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जिस विकास को देश की प्रगति का पैमाना बताया जा रहा है, वही विकास आज सवालों के घेरे में है। जंगलों की अंधाधुंध कटाई, नदियों पर कब्ज़ा, ज़मीन का लगातार दोहन और कंक्रीट के जंगलों का विस्तार—क्या यही विकास है? इसका सबसे दर्दनाक चित्र तब सामने आता है जब जंगलों के जानवर सड़कों पर आकर इंसानों से भोजन मांगने को मजबूर हो जाते हैं।

देश के कई हिस्सों में अब यह आम दृश्य बनता जा रहा है कि बंदर, हिरण, हाथी और अन्य वन्य जीव आबादी वाले इलाकों में भटकते दिखाई देते हैं। कभी जंगलों में भरपूर भोजन और सुरक्षित आवास पाने वाले ये जीव आज भूख और बेबसी के शिकार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य कारण जंगलों का तेजी से सिकुड़ना और प्राकृतिक संसाधनों का असंतुलित उपयोग है।

पर्यावरणविदों के अनुसार, “विकास के नाम पर जब जंगल काटे जाते हैं, नदियों को प्रदूषित किया जाता है और ज़मीन को ज़हरीले रसायनों से खराब किया जाता है, तो इसका सीधा असर न केवल जानवरों पर बल्कि इंसानों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।” प्रदूषित हवा, जहरीला पानी और रासायनिक खाद से उपजी फसलें आज इंसान के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ कर रही हैं।

शहरों में बढ़ती बीमारियाँ, सांस से जुड़ी समस्याएँ और जल संकट इस तथाकथित विकास के दुष्परिणाम हैं। सवाल यह है कि क्या ऐसा विकास, जो प्रकृति और मानव—दोनों के लिए खतरा बन जाए, वास्तव में प्रगति कहलाएगा?

आज ज़रूरत है संतुलित और टिकाऊ विकास की—ऐसे विकास की जो जंगलों को बचाए, नदियों को जीवन दे और इंसान व जानवर के बीच सामंजस्य बनाए।
जंगली जानवर क्यों ज़रूरी हैं?

1. खाद्य श्रृंखला का संतुलन
हर जीव किसी न किसी रूप में एक-दूसरे पर निर्भर होता है। यदि एक कड़ी टूटती है, तो पूरा पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ जाता है।


2. वनों और प्रकृति का संरक्षण
कई जानवर बीज फैलाने, जंगल को स्वस्थ रखने और कीटों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करते हैं।


3. जलवायु संतुलन
स्वस्थ जंगल और जैव विविधता कार्बन डाइऑक्साइड को नियंत्रित करती है, जिससे जलवायु परिवर्तन की गति कम होती है।

फिर इंसान उन्हें क्यों भूल जाता है?

विकास की संकीर्ण परिभाषा:
इंसान अक्सर विकास को केवल सड़क, इमारत, उद्योग और आर्थिक लाभ से जोड़कर देखता है।

तत्काल लाभ की सोच:
प्रकृति के दीर्घकालिक नुकसान की तुलना में अल्पकालिक फायदे ज़्यादा आकर्षक लगते हैं।

अलगाव की भावना:
इंसान यह भूल जाता है कि वह भी प्रकृति का ही हिस्सा है, उससे अलग नहीं।


सच्चा विकास क्या होना चाहिए?

सच्चा विकास वही है जिसमें

इंसान की प्रगति हो

और प्रकृति तथा जीव-जंतुओं का अस्तित्व सुरक्षित रहे


यदि जंगली जानवर नहीं रहेंगे, तो अंततः पर्यावरण असंतुलन का असर इंसान पर ही पड़ेगा—जल संकट, बीमारियाँ, जलवायु आपदाएँ इसी का परिणाम हैं।
जंगली जानवर कोई बाधा नहीं, बल्कि प्रकृति के रक्षक हैं। उन्हें बचाना दरअसल अपने भविष्य को बचाना है।। वरना आने वाली पीढ़ियाँ हमसे यही पूछेंगी: यह कैसा विकास था?

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