महरा/माहरा समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार ने बढ़ाई पहल, छत्तीसगढ़ को उचित कार्रवाई के निर्देश
रायपुर। छत्तीसगढ़ के महरा/माहरा समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) की श्रेणी में शामिल करने और जनगणना में उचित वर्गीकरण सुनिश्चित करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर पहल की गई है। इस संबंध में भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ ने राज्य की संबंधित व्यवस्था को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किया है।
प्राप्त दस्तावेज के अनुसार, भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय, नई दिल्ली को महरा/माहरा समुदाय को अनुसूचित जाति से अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने तथा जनगणना वर्गीकरण के लिए उचित निर्देश देने की मांग से संबंधित पत्र प्राप्त हुआ था। यह पत्र 29 अप्रैल 2026 को दुर्ग जिले के संयुक्त महरा/माहरा समाज छत्तीसगढ़ की ओर से भेजा गया था।
पत्र में समाज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष लखन लाल मेश्राम द्वारा समुदाय की मांग को उठाया गया था। इसके बाद भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय ने मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ को प्रेषित किया।
समाज की मांग को मिला प्रशासनिक स्तर पर महत्व
9 जून 2026 को डिजिटल हस्ताक्षरित पत्र में जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ ने संबंधित पत्र को आवश्यक कार्रवाई के लिए अग्रेषित किया है। इससे महरा/माहरा समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर आगे की प्रक्रिया की उम्मीद जगी है।
समाज की प्रमुख मांग है कि महरा/माहरा समुदाय की सामाजिक स्थिति एवं संबंधित तथ्यों पर विचार करते हुए उसे अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने की दिशा में उचित कदम उठाए जाएं। साथ ही, जनगणना के दौरान समुदाय का वर्गीकरण नियमानुसार सुनिश्चित किया जाए।
अब समाज की निगाहें आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि मांग पर सकारात्मक निर्णय होता है, तो यह महरा/माहरा समाज के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।
