बाढ़ की मार से नेपाल का पर्यटन उद्योग बेहाल, भारत से आने वाले पर्यटकों पर टिकी बड़ी उम्मीद
काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का असर अब पर्यटन कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बाढ़ और भूस्खलन से हुई भारी तबाही के बीच सितंबर से नवंबर तक चलने वाले पीक टूरिस्ट सीजन में होटल और ट्रैवल कंपनियों की बुकिंग रद्द होने लगी है, जिससे पर्यटन व्यवसायियों की चिंता बढ़ गई है।
नेपाल सरकार के वर्ष 2024 के पर्यटन आंकड़ों के मुताबिक, उस वर्ष नेपाल में कुल 11.48 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे थे। इनमें करीब 3.18 लाख पर्यटक भारत से आए, जो कुल विदेशी पर्यटकों का लगभग 27.7 प्रतिशत है। इसके बाद अमेरिका से 9.69 प्रतिशत और चीन से 8.88 प्रतिशत पर्यटक नेपाल पहुंचे। आंकड़ों के लिहाज से नेपाल आने वाले हर चार विदेशी पर्यटकों में लगभग एक भारतीय था।
हालांकि, 26 अगस्त को आई बाढ़ ने नेपाल के पर्यटन कारोबार की तैयारियों को बड़ा झटका दिया है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक बाढ़ से करीब 400 अरब नेपाली रुपये के नुकसान की आशंका जताई गई है। हादसे में अब तक 1,344 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 5 हजार लोग लापता बताए गए हैं।
बाढ़ का असर अब पर्यटन कारोबार की बुकिंग पर भी दिखने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर से नवंबर के पीक टूरिस्ट सीजन में होटल और ट्रैवल कंपनियों की बुकिंग रद्द होने लगी हैं। काठमांडू के एक होटल में करीब 20 प्रतिशत बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं। होटल प्रबंधन के अनुसार, बाढ़ के बाद विशेष रूप से ऑनलाइन बुकिंग में तेजी से कैंसिलेशन देखने को मिला है।
भारतीय पर्यटकों पर टिकी उम्मीद
नेपाल के पर्यटन कारोबार में भारतीय पर्यटकों की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण अब व्यवसायियों की नजर भारत से आने वाले पर्यटकों पर भी है। धार्मिक पर्यटन, हिमालयी क्षेत्रों की यात्रा और प्राकृतिक पर्यटन के लिए बड़ी संख्या में भारतीय नेपाल पहुंचते हैं। ऐसे में यदि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति जल्द सामान्य होती है और प्रमुख पर्यटन मार्ग सुरक्षित किए जाते हैं, तो भारतीय पर्यटक नेपाल के पर्यटन उद्योग को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, मौजूदा हालात में पर्यटन कारोबार की वास्तविक स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि बाढ़ से प्रभावित सड़क, परिवहन और पर्यटन स्थलों को कितनी तेजी से बहाल किया जाता है।

