“किताब नहीं निकालने पर बरसीं थप्पड़, छात्र के दोनों कान 80% तक डैमेज — शिक्षिका गिरफ्तार”
रायगढ़/राजनांदगांव।
स्कूल में अनुशासन के नाम पर की गई हिंसा ने एक मासूम छात्र की जिंदगी बदल दी। एक शिक्षिका द्वारा महज किताब नहीं निकालने पर छात्र को लगातार थप्पड़ मारने का मामला सामने आया है, जिसमें बच्चे के दोनों कानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
जानकारी के अनुसार, कक्षा 7 के छात्र ने शिक्षिका से पढ़ाई के दौरान निर्देश दोहराने की बात कही थी। इसी बात से नाराज होकर शिक्षिका ने उसे 3 से 4 जोरदार थप्पड़ जड़ दिए। एक थप्पड़ सीधे कान पर लगा, जिससे छात्र की सुनने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो गई।
घटना के बाद छात्र ने घर पहुंचकर परिजनों से सुनाई नहीं देने की शिकायत की। चिंतित परिवार ने तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया, जहां जांच में सामने आया कि छात्र के एक कान की सुनने की क्षमता लगभग 70% और दूसरे की करीब 80% तक प्रभावित हो चुकी है।
इस गंभीर लापरवाही और हिंसा को देखते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
👉 यह घटना न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी बताती है कि अनुशासन और हिंसा के बीच की रेखा कितनी पतली है—और उसे पार करना कितना खतरनाक हो सकता है।

