“1928 का ऐतिहासिक घरघोड़ा तहसील भवन बदहाल—टपकती छत के नीचे दम तोड़ती विरासत”
📍 घरघोड़ा तहसील | विशेष रिपोर्ट
कभी प्रशासनिक गौरव का प्रतीक रहा घरघोड़ा तहसील भवन आज अपनी ही जर्जर हालत पर सवाल खड़ा कर रहा है। वर्ष 1928 में तत्कालीन ब्रिटिश अधिकारी K. L. B. Hamilton द्वारा उद्घाटित यह ऐतिहासिक इमारत अब उपेक्षा की मार झेल रही है और तत्काल जीर्णोद्धार की मांग कर रही है।
समय के साथ इस भवन की हालत लगातार खराब होती गई है। दीवारों में गहरी दरारें, जगह-जगह से उखड़ता प्लास्टर और कमजोर होती संरचना साफ संकेत दे रही है कि यह धरोहर अब खतरे के मुहाने पर खड़ी है।
👉 बरसात में बनती है भयावह स्थिति
बारिश का मौसम आते ही तहसील भवन की समस्याएं और बढ़ जाती हैं। खप्पर की छत से लगातार पानी टपकता है, जिससे कार्यालय के अंदर रखी महत्वपूर्ण फाइलें और दस्तावेज भीगने के कगार पर पहुंच जाते हैं। कर्मचारी मजबूरी में पन्नी और तिरपाल लगाकर काम चलाते हैं, लेकिन यह अस्थायी उपाय कभी भी नाकाफी साबित हो सकता है।
👉 स्थानीयों में नाराजगी, हादसे का डर
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से भवन की मरम्मत नहीं हुई है और हर साल बारिश में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। लोगों को डर है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
📢 प्रशासन से उठी मांग
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस ऐतिहासिक तहसील भवन का जल्द से जल्द जीर्णोद्धार कराया जाए। विशेष रूप से छत की मरम्मत और पूरी संरचना को मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है, ताकि न केवल इस विरासत को बचाया जा सके बल्कि कर्मचारियों और आम जनता की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
⚠️ अब सवाल यही है
क्या प्रशासन इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएगा, या फिर टपकती छत के नीचे फाइलों के साथ-साथ व्यवस्था भी यूं ही भीगती रहेगी?

