February 4, 2026

डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में कदम – अदाणी फाउंडेशन द्वारा मिलुपारा और कुंजेमुरा में नि:शुल्क कंप्यूटर एवं एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

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रायगढ़। अदाणी फाउंडेशन ने स्थानीय महिलाओं और युवतियों को तकनीकी शिक्षा से सशक्त बनाने के उद्देश्य से ग्राम मिलुपारा और कुंजेमुरा में नि:शुल्क कंप्यूटर एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ना और उन्हें रोजगार के नए अवसरों के लिए तैयार करना है।
ग्राम मिलुपारा और कुंजेमुरा में अदाणी फाउंडेशन द्वारा शुरू किए गए नि:शुल्क कंप्यूटर एवं एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में नई बहस छिड़ गई है। जहाँ एक ओर इसे महिला सशक्तिकरण का प्रयास बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह पहल दरअसल अदाणी कंपनी की ओर से गाँवों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने और सामाजिक स्वीकृति हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि डिजिटल प्रशिक्षण और प्रमाणपत्रों की आड़ में कंपनी धीरे-धीरे गाँव के सामाजिक ढांचे में प्रवेश कर रही है, ताकि भविष्य में अपने औद्योगिक और व्यावसायिक हितों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा सके। उनका कहना है कि पहले शिक्षा, फिर स्वास्थ्य, और उसके बाद रोजगार—इस तरह की योजनाओं के ज़रिये कंपनी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण समाज से नज़दीकी बढ़ा रही है।

मिलुपारा में कार्यक्रम का शुभारंभ सरपंच व पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुआ, वहीं कुंजेमुरा में भी जनपद सदस्य और सरपंच की सहभागिता देखी गई। ग्रामीणों का सवाल है कि जब एक निजी कॉर्पोरेट समूह पंचायत स्तर तक सक्रिय भूमिका निभाने लगे, तो उसके पीछे मंशा क्या है?

कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि

> “कंप्यूटर सिखाना गलत नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह निःस्वार्थ है या आने वाले समय में भूमि, संसाधन और सहमति हासिल करने की तैयारी?”



आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से कंपनी अपने खिलाफ उठने वाली आवाज़ों को कमजोर करना चाहती है, ताकि भविष्य में यदि किसी परियोजना या विस्तार का विरोध हो, तो ‘हम तो गाँव के विकास के लिए काम कर रहे हैं’ का नैरेटिव पहले से तैयार रहे।

हालाँकि अदाणी फाउंडेशन की ओर से इस पहल को महिला आत्मनिर्भरता और डिजिटल जागरूकता से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या यह सचमुच समाज सेवा है या कॉर्पोरेट रणनीति का अगला कदम?

ग्रामीणों की निगाह अब इस बात पर टिकी है कि आगे कंपनी की गतिविधियाँ किस दिशा में जाती हैं—सेवा तक सीमित रहती हैं या संसाधनों पर दखल की ओर बढ़ती हैं।
अदाणी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह पहल महिलाओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने और उन्हें रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तकनीकी जागरूकता बढ़ने से स्थानीय समुदाय में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

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