महाजेनको ने सराईटोला–मुड़ागांव के वन समुदाय को दिया 7 करोड़ का चेक: वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में बड़ी पहल
रायगढ़ / सराईटोला–मुड़ागांव से विशेष रिपोर्ट
महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड—महाजेनको (MAHAGENCO)—ने सराईटोला और मुड़ागांव क्षेत्र के वनाधिकार धारक समुदायों को 7 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। यह भुगतान वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत मिलने वाले Forest Community Rights (FCR) दावों के एवज में किया गया बताया जा रहा है।
11 दिसंबर 2023 की तिथि वाला यह चेक क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह पहला अवसर है जब किसी बड़े पावर सेक्टर उपक्रम ने इस पैमाने पर वन समुदाय को सीधे मुआवजा भुगतान किया है।
चेक पर स्पष्ट उल्लेख—‘वन समुदाय अधिकार भुगतान’
महाजेनको द्वारा जारी चेक में भुगतान का कारण स्पष्ट रूप से लिखा गया है:
“Forest Community Rights Payment for Compartment 740 P and 741 P”
यह दर्शाता है कि कंपनी की प्रस्तावित कोयला खदान परियोजनाओं के कारण कम्पार्टमेंट 740 पी और 741 पी क्षेत्र में स्थित वनाधिकार और सामुदायिक संरचनाएँ प्रभावित होंगी, जिसकी भरपाई के लिए यह भुगतान किया गया है।
चेक में प्राप्तकर्ताओं के रूप में ये नाम दर्ज हैं:
अमृतलाल भगत
जहाजराम भगत
भरतलाल सिदार
या धारक (Or Bearer)
यह उल्लेख स्पष्ट करता है कि भुगतान सामुदायिक प्रतिनिधियों के माध्यम से किया जाना है, न कि व्यक्तिगत आधार पर।
वनाधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह भुगतान केवल एक वित्तीय मुआवजा नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि सरकारी और निजी कंपनियाँ अब वन अधिकार अधिनियम को नजरअंदाज करने के बजाय उसका पालन करने को बाध्य हैं।
ग्राम सभा के कुछ सदस्यों ने बताया—
> “पहली बार किसी बड़ी कंपनी ने FCR को गंभीरता से लेते हुए इतने बड़े पैमाने पर राशि प्रदान की है। यह समुदाय के अधिकारों की मान्यता का एक महत्वपूर्ण संकेत है।”
स्थानीय स्तर पर विभाजित प्रतिक्रियाएँ
एक ओर कई ग्रामीण इसे अधिकारों की जीत के रूप में देख रहे हैं, वहीं कुछ लोगों को चिंता है कि आगे आने वाले समय में इस मुआवजे का असर जमीन, जंगल और आजीविका पर गहरा पड़ सकता है।
इन आशंकाओं से साफ है कि वन अधिकारों को लेकर समुदाय अब भी सजग है और आगे की प्रक्रियाओं पर नजर बनाए हुए है।
महाजेनको के लिए ‘अनिवार्य प्रक्रिया’ बनता जा रहा वन अधिकार अनुपालन
खदान विस्तार या नई खदानों के विकास से पहले कंपनियों को—
ग्राम सभाओं की सहमति,
वन अधिकार दावों की मान्यता,
और प्रभावित समुदायों को उचित मुआवजा—
देना कानूनन अनिवार्य है।
यह भुगतान उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार महाजेनको द्वारा भविष्य में और भी कई दावों पर विचार किया जा सकता है।
समुदाय की जीत या संघर्ष की नई शुरुआत?
7 करोड़ रुपये का यह चेक एक तरफ समुदाय को आर्थिक सहारा देता है, वहीं दूसरी तरफ यह संकेत भी देता है कि सराईटोला–मुड़ागांव क्षेत्र में आने वाले महीनों में खनन गतिविधियों और वनाधिकार संबंधी प्रक्रियाएँ तेज़ होंगी।
स्थानीय लोगों का मानना है—
> “पैसा मिला है, पर संघर्ष खत्म नहीं हुआ।
महाजेनको का यह कदम चाहे जितना भी महत्वपूर्ण क्यों न हो, ग्रामीणों के भरोसे और उनकी चिंता—दोनों को बराबरी से समझना जरूरी है।

