मां-बेटी हत्याकांड में आरोपी को आजीवन कारावास
निरीक्षक कुमार गौरव साहू की धारदार विवेचना ने दिलाया न्याय
रायपुर | दीनदयाल नगर थाना क्षेत्र के चंगोराभांठा में अक्टूबर 2022 में हुए दोहरे हत्याकांड पर 27 नवंबर को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। माननीय द्वादश अपर सत्र न्यायाधीश रायपुर श्री दिग्विजय सिंह ने आरोपी सौरभ उपाध्याय को धारा 302 आईपीसी के तहत आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। यह फैसला केवल अभियोजन की जीत नहीं, बल्कि एक निष्ठावान विवेचना अधिकारी की अदम्य प्रतिबद्धता का परिणाम है—और वह नाम है तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव साहू।
घटना जिसने पूरे शहर को झकझोरा
20 अक्टूबर 2022 की सुबह प्रार्थी विवेक पांडे को मकान मालिक से सूचना मिली कि उसकी मां रमा पांडे और बहन मनीषा उपाध्याय अपने ही घर में मृत पड़ी हैं। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ कि मनीषा के पति सौरभ उपाध्याय ने पारिवारिक विवाद के चलते लोहे के पाइप से हमला कर दोनों की निर्मम हत्या की और फरार हो गया।
डीडी नगर थाना में हत्या का अपराध क्रमांक 513/2022 दर्ज हुआ और इसके साथ ही शुरू हुई एक बेहद संवेदनशील और जटिल केस की विवेचना।
निरीक्षक कुमार गौरव साहू: निर्णायक नेतृत्व और वैज्ञानिक जांच की मिसाल
अपराध स्थल पर कदम रखते ही निरीक्षक साहू ने मामले को अपने नियंत्रण में लिया।
घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण
महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य सुरक्षित
फॉरेंसिक टीम के साथ वैज्ञानिक विश्लेषण
आरोपी की तलाश के लिए लक्षित कार्रवाई
एक-एक तथ्य को जोड़कर कानूनी रूप से अभेद्य केस तैयार
विवेचना इतनी सटीक और तार्किक थी कि अदालत में आरोपी का बचाव पूरी तरह ढह गया।
साक्ष्य बने सबसे बड़ा हथियार
अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक श्रीमती जानकी बिलथरे ने अदालत में निरीक्षक साहू द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया।
अदालत में प्रस्तुत—
14 दस्तावेजी साक्ष्य
35 गवाहों के बयान
अभियोजन के पक्ष में इतने ठोस साबित हुए कि अदालत ने सभी तर्कों को मान्यता देते हुए आरोपी को दोषी ठहराया।
न्यायालय का स्पष्ट मत
न्यायालय ने माना कि
> “आरोपी सौरभ उपाध्याय ने लोहे के पाइप से अपनी पत्नी और सास की हत्या की, जो अत्यंत क्रूर कृत्य है।”
इस आधार पर उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
घरघोड़ा में भी तेज और पारदर्शी जांच की पहचान
वर्तमान में निरीक्षक कुमार गौरव साहू घरघोड़ा थाना प्रभारी के रूप में पदस्थ हैं, जहाँ उनकी तेज, निष्पक्ष और परिणामकारी विवेचना के कारण कई आपराधिक मामलों में लगातार सफलता मिल रही है। उनकी कार्यशैली पुलिसिंग के आदर्श मॉडल के रूप में देखी जा रही है।
यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि जब जांच ईमानदार, वैज्ञानिक और तार्किक हो—तो सच अदालत में खुद-ब-खुद सामने आ जाता है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में निरीक्षक कुमार गौरव साहू का योगदान हमेशा मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।

