July 13, 2026

पुनर्वास नहीं तो आंदोलन तेज: 15 जुलाई को SDM कार्यालय में शांतिपूर्ण ज्ञापन देंगे विस्थापित

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रायगढ़/घरघोड़ा।
क्षेत्र में जमीन, मकान और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं को लेकर विस्थापित परिवार अब आंदोलन के तीसरे चरण में प्रवेश करने जा रहे हैं। “छूटे मकान एवं आवश्यकता अनुसार निर्माण मकान” की मांग को लेकर ग्राम बरोट के प्रभावित परिवारों ने 15 जुलाई 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय में शांतिपूर्ण ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है।

जारी सूचना के अनुसार यह कार्यक्रम बुधवार, 15 जुलाई को सुबह 11 बजे आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में प्रभावित और विस्थापित परिवारों के शामिल होने की संभावना है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों को प्रशासन के समक्ष रखेंगे।

क्या है प्रमुख मांग

विस्थापित परिवारों का आरोप है कि कई लोगों को अब तक पूर्ण रूप से मकान या उचित पुनर्वास नहीं मिला है। ऐसे में “छूटे मकानों” को शामिल कर आवश्यकता अनुसार नए मकानों के निर्माण की मांग को लेकर यह ज्ञापन सौंपा जाएगा।

“हमारा अधिकार, हमारी लड़ाई”

आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह संघर्ष पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन अपने अधिकारों को लेकर सभी प्रभावित परिवार एकजुट हैं। उनका कहना है कि—

> “हम एकजुट हैं, संगठित हैं और अपने हक के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध हैं।”



सामाजिक संगठनों और मीडिया से अपील

कार्यक्रम में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों से भी उपस्थित होकर समर्थन देने की अपील की गई है, ताकि विस्थापित परिवारों की आवाज प्रशासन तक मजबूती से पहुंच सके।

सभी प्रभावितों से शामिल होने की अपील

आयोजकों ने समस्त पीड़ित एवं विस्थापित परिवारों से कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर इसे सफल बनाने का आह्वान किया है। उनका मानना है कि एकता और सामूहिक प्रयास से ही अधिकारों की लड़ाई को मजबूती मिलेगी।


कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम प्रशासन के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है कि यदि पुनर्वास और आवास से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन आगे और तेज हो सकता है।

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अदाणी पावर फेज-III परियोजना की जनसुनवाई संपन्न, हजारों ग्रामीणों ने विकास, रोजगार और पर्यावरण पर रखे अपने सुझाव

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा अदाणी पावर लिमिटेड की प्रस्तावित फेज-III (2×800 मेगावाट अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना) के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। जनसुनवाई में परियोजना से प्रभावित 29 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीणों ने भाग लेकर विकास, रोजगार, पुनर्वास तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी और अधिकारियों से विभिन्न प्रश्न पूछे।

भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना के तहत आयोजित इस जनसुनवाई की अध्यक्षता अपर कलेक्टर एवं अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी अपूर्व प्रियेश टोप्पो ने की। इस दौरान छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी मानवेन्द्र शेखर पाण्डेय की उपस्थिति में पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई। अदाणी पावर लिमिटेड के अधिकारियों ने परियोजना के फेज-III विस्तार की विस्तृत जानकारी ग्रामीणों के सामने प्रस्तुत की।

जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों द्वारा पूछे गए सभी सवालों और सुझावों का विस्तार से जवाब दिया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि परियोजना के विस्तार से स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे, वहीं क्षेत्र में व्यापार, परिवहन और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि परियोजना में आधुनिक अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे ऊर्जा उत्पादन अधिक दक्षता के साथ होगा तथा पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के सभी निर्धारित मानकों का पालन करने का आश्वासन दिया गया।

अदाणी पावर लिमिटेड ने स्पष्ट किया कि परियोजना से जुड़े सभी कार्य भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन के पर्यावरणीय मानकों तथा वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप किए जाएंगे। पूरी जनसुनवाई प्रशासन और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की निगरानी में संपन्न हुई।

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कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि परियोजना में आधुनिक अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे ऊर्जा उत्पादन अधिक दक्षता के साथ होगा तथा पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के सभी निर्धारित मानकों का पालन करने का आश्वासन दिया गया।

अदाणी पावर लिमिटेड ने स्पष्ट किया कि परियोजना से जुड़े सभी कार्य भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन के पर्यावरणीय मानकों तथा वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप किए जाएंगे। पूरी जनसुनवाई प्रशासन और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की निगरानी में संपन्न हुई।

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